Friday, October 7, 2011

बकवास

आज़ादी. . हर आज़ादी दिवस पर एक सवाल दिल पूछता है के कितने आज़ाद हैं हम. . ये भी साला पोलिटिकल हो जाता है. . तेरे को आज़ादी दिवस के दिन ही ख्याल आता है. . ये पूछ कि कितने ज़िम्मेदार हैं हम.??

कल कहीं बम फूटा. . कल कहीं विस्फोट हुआ. .
कल का भरोसा नही. . ज़िंदगी रोज़ खेलती जुआ. .

मौत को आज कल हम जेब मे लेकर घूमते हैं. . बल्कि ज़िंदगी को. . कभी भी निकालनी पड़ सकती है|
हम भले आज ज़िंदा ही हो. .हमारी संवेदना ही मर चुकी. .आज कौन ही दूसरो के लिए जीता है. . अपना ख्याल रखने की तो फ़ुर्सत नही. . आज न्यूज़ सुनी की इतने मारे. . कल को लोग फिर से नौकरियों पर जाने लगे. . इसे हम "Moved on" कहते हैं| पर  वास्तव मे तो हम असंवेदनशील हो चुके हैं. .independence day पर भी हमें .रहमान या लता जी वाला "वन्दे मातरम" सुनना पड़ता है  feel मे घुसने  के लिए. . हम प्रगती के नाम पर और भी Delhi -Mumbai  बनाना चाहते हैं. . पर आज भी लखनऊ-इलाहबाद-बनारस  मे ही सुकून पाते हैं. .

हमें देश पर गर्व है. . क्यूँ है?? जनसँख्या बेलगाम बढे जा रही है . . फिर भी China जैसों को man power का धोंस नही दिखा सकते. . आंतरिक सुरक्षा तो बड़ी ही लचक है हमारी . . हाल में पढ़े एक सर्वे के अनुसार औरतों के लिए India सबसे unsafe country है ! . .और टेक्निकली डेवेलप्ड तो ढेरो पड़े हैं हमसे ज़्यादा, , रही देश की विविध प्राकृतिक सम्पदा. . तो हमने अपनी तरफ से इसमे कुछ भी नही किया. . बल्कि देश की प्राकृतिक सुन्दरता को बनाये रखने में भी खर्च की जाने वाली सरकारी धन राशी कई  अधिकारिओं के घर की सुन्दरता बढाने में लगायी जाती हैं! वर्तमान में, मैं UAE के एक छोटी सी city, AL Ain में कार्यरत हूँ और यहाँ पर के लोगों ने एक रेगिस्तान को सिंचाई की विकसित तकनीक की बदौलत और अपनी लगन से पूरा हरा भरा बना डाला . . एक पूरा शहर बसा डाला।
ग़रीब-उत्थान के लिए जहाँ ग़रीबी रेखा ही नीचे कर दी जाती है. .लो भाई मुबारक, देश मे नयी परिभाषा के अनुसार कोई भी ग़रीब नही है. . 32 Rs/day कमाने वाला गरीब नहीं है। इतने में  तो बस unsubsidised cylinder ही किसी तरह महीने में arrange कर पायेगा ,खाने-पकाने के लिए सब्जियां कहाँ हीं जुगाड़ पायेगा, और फिर उनके दाम भी तो दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रहे हैं।
मैं आशावादी हूँ. . देश को बदलने की ज़रूरत है. . और देश मे बदलाव दिख रहा है. . आज की युवा पीढ़ी किसी बुड्ढे (anna) की यलगार से जागती है पर फिर भी जागी तो न! अगला भारत युवा भारत हो!! साला हमारा भी राष्ट्रपति कभी अमेरिका क प्रेसीडेंट से younger हो!! 

8 comments:

  1. फुर्सत के कुछ लम्हे--
    रविवार चर्चा-मंच पर |
    अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति के साथ,
    आइये करिए यह सफ़र ||
    चर्चा मंच - 662
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  2. जोशपूर्ण आलेख.

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  3. बहुत खूब भाई .

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  4. इस युवा कलम को पढ़कर ऐसा अनुभव हुआ मानो राख हुई संवेदना ने कहीं दूर जलती चिंगारी देख ली!
    ..बहुत बधाई। यूँ ही लिखते रहो अपने मन की खरी-खरी, बगैर किसी से प्रभावित हुए।

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  5. @devendra pandey ji. . dhanyavaad!
    aur aapki baat jarur dhyan me rakhunga. .

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