Showing posts with label song. Show all posts
Showing posts with label song. Show all posts

Friday, May 7, 2010

आज फिर..



-->
तेरे  मुस्कुराने से  जैसे चाँद निकलता  है ...
हुस्न  तेरा  कितने  गुनाह  हर रोज़  करता  है ..
हम मरे कई बार तो वे भी मरे कई बार..
तू दर्द देती है मगर वो दर्द भी स्वीकार...
तेरा आना फिर कहे कुछ यूँ चला जाना...
लगता है बन्ने को है नया कोई अफसाना...
फिर से चलने अब लगी कुछ वैसी हवाएं...
फिर से नाचे मोर .. अंगराई लीं लताएँ...
हम तो बहकने अब लगे उसकी हर  एक  बात पर  ...
एक नशा सा होता है अब उसके  ख्यालात  पर  
उसकी लटें  बिखरती है जब चेहरे क सामने... 
लोग लग  जाते  है  फिर  दिलो  को  थामने ..
~Feel the wind , Feel the rain; Feel the fun, Feel the pain. .Its gotta b love who's knocking the doors of my heart once again. .~

Sunday, February 14, 2010

Wo Pal Gaye....

ON THE EVE OF Valentine's day..
This evening a friend of mine was thinking of writing a poem in hindi for the first time.. he thought of the first line and told it to me.. what i did next is in front of u.. cudnt actually resist myself ..actually the thoughts dint let me to do so..dey kept on coming...and that's how I ended up writing a poem with the first line..hope u'll like it..



आज अपने सोचने के दायेरे बदल गए..
देखता हूँ एक साल में सारे बदल गए...
खुश तो है वे आज भी...
पर साथ अब मेरे नहीं..
हस्त-रेखा नैन-नक्श तारे बदल गए...
अब मुस्कुराते हैं लोग..नजाने कितनी वजहों पर..
वो हँसते साथ अपने ...या हंस रहे होते हम पर...
मुस्कुराहट तो थी  क़यामत उनकी..

पर वो मेरी हर बात पर बस मुस्कुरा के चल गए...
आज अपने सोचने के दायेरे बदल गए..
देखता हूँ एक साल में सारे बदल गए...

 
नज़रें हैं वहीं...बस नज़ारे बदल गए...

देखता हूँ एक साल में सारे बदल गए..!! 
हंसा कभी..कभी रोया भी..
पाया बहुत...तो कुछ खोया भी ...
हम मरे बराबर ....बस!हत्यारे बदल गए..
आज अपने सोचने के दायेरे बदल गए..
देखता हूँ एक साल में सारे बदल गए
.. !!
लहरें तो आज भी टकराती हैं किनारों से..
पर आज शायद उनकी पसंद के किनारे बदल गए...!!

Monday, January 25, 2010

Hum Bure Hi Sahi...

तुमने बुरा जो कह दिया तो हम बुरे ही सही...
अच्छा बनने का कोई अब इरादा भी नहीं...

रिश्ते निभने  हैं तो अब निभ जायेंगे खुद से ही...
पर निभाने का पहले से अब कोई वादा नहीं...

खुद को बदल तो रहे थे हम तेरे मुताबिक ही..
वक़्त ही माँगा था बस और कुछ ज्यादा नहीं..

तुम गए डर मगर ये ठोकरे तो लगनी ही थी..
रास्ता इश्क का कभी होता सीधा-साधा नहीं...

तुम्हे जाना था छोड़ कर ये तेरी मर्जी ही थी...
के खुद की ख्वाहिशें कभी तुझपे लादा नहीं...

तुमने बुरा जो कह दिया तो हम बुरे ही सही...


Friday, October 23, 2009

कल-तक













ये ज़िन्दगी इतनी हंसी होगी कभी सोचा न था...
कल तक मैं न जाने क्या था और मैं कहाँ था...

कल तक न कोई मकसद था... कल तक न कोई इरादा था…
कल तक न कोई अपना था…न उनसे किया कोई वादा था...

तुम अब जो आये हो मेरी इस ज़िन्दगी में…
ये कैसा जादू सा कर दिया इस दिल्लगी ने…

कल तक अनजानी राहों पर मैं आवारा फिरता था
कल तक जो हर मोड़ पर खा के ठोकर गिरता
था...

पर तुने थामा जो हाथ ...बदले हालात ओ सनम
तुने ही तो बस समझे मेरे जज्बातों को सनम…

कल तक मोहब्बत से डरता था... कल तक दिल ऐसे न धड़कता था
कल तक किसी पे न भरोसा था... कल तक सबने इसे बस कोसा
था

पर जबसे तुम हो हँसे मेरी इन हरकतो पर
बनालो न हमको हाँ तुम अपना हमसफ़र…

सोया था दिल जागा है
अब,,भागा है अब ,,बड़ी जोर से…
इशारा एक बस चाहिए इस दिल को तेरी ओर से…

Wednesday, October 21, 2009

अल्फाज़-ऐ-इश्क..

(खुशनुमा मौसम है और मदमस्त हवाएं
आपकी इजाज़त हो तो एक गीत सुनाएँ... )

अल्फाज़-ऐ-इश्क
तेरे ओंठो को छू कर जो निकले
तेरे साँसों की गर्मी से ये पत्थर भी पिघले

जब भीड़ में भी तन्हाई का एहसास होने लगे
तब फासले का गम होके नम पलकें भिगोने लगे

इन महफिलों मै ये आखें उन्हें ढूँढती फिरे
और जब दिखें वो सामने ये पलकें जा गिरें

हर लव्ज़ तेरे दिल पे मेरे करते खलबली
तेरी अदा झूमती लता मुस्कान खिलती कली

छुई हथेली जान ले ली ये दिल रहा मेरा
तेरे लिए !अज़ीज़ क्या देहलीज़ क्या पेहरा

जी
माफ़ करना गर खता कोई हुई हमसे
मैं बिरही बिलख रहा हूँ तेरे बिलगने से

तकदीर से था फ़कीर, कैसे मिल गई जागीर
आखें तेरी मेरी
सलाखें हुस्न हुई ज़ंजीर

तुझसे से मेरी सुबह है तू ही आफताब है
बे-ऐब होती न हकीकत तू एक ख्वाब है.!